शनिवार 18 अप्रैल 2026 - 09:03
जल-डमरूमध्य होर्मुज़ में ईरान को नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी

हौज़ा / क़ुम अल मुकद्दस के इमाम ए जुमआ आयतुल्लाह सैयद मोहम्मद सईदी ने जुमआ के ख़ुत्बे में सूरह अल-फ़तह की तिलावत की और उन्होने कहां, जल-डमरूमध्य होर्मुज़ के संदर्भ में ईरान पर इस बात पर ज़ोर दिया कि वह रिएक्शन की नीति से बाहर निकलकर क्षेत्र में सक्रिय योजना, शासन और कूटनीतिक नेतृत्व की भूमिका निभाए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , क़ुम अल मुकद्दस के इमाम ए जुमआ आयतुल्लाह सैयद मोहम्मद सईदी ने जुमआ के ख़ुत्बे में सूरह अल-फ़तह की तिलावत की और उन्होने कहां, जल-डमरूमध्य होर्मुज़ के संदर्भ में ईरान पर इस बात पर ज़ोर दिया कि वह  रिएक्शन की नीति से बाहर निकलकर क्षेत्र में सक्रिय योजना, शासन और कूटनीतिक नेतृत्व की भूमिका निभाए।

आयतुल्लाह सईदी ने कहा कि क़ुरआन के दृष्टिकोण से वली की बैयत कोई राजनीतिक और सामाजिक अनुबंध नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक कर्तव्य है जो ईश्वर को प्रसन्न करता है और इसका फल समाज के फैलाव और गंभीर संकटों में ईमानदारों के दिलों को शांति मिलना है। जो समाज वली के इर्द-गिर्द एकत्रित हो जाता है, वह न तो चिंता का शिकार होगा और न ही टूटेगा, और इस प्रकार की बैयत पर डटे रहने का इनाम विजय और सहायता है।

उन्होंने कहा,या तो ईरान जल-डमरूमध्य होर्मुज़ के कानूनों का निर्धारण करेगा, नहीं तो कोई दूसरा होर्मुज़ के लिए सिद्धांत तय करेगा। इस महत्वपूर्ण मामले में कोई खाली जगह नहीं बचेगी। अगर हमने मैदान नहीं संभाला तो दूसरे आकर संभाल लेंगे। अगर हम देशों को इकट्ठा नहीं करेंगे तो दूसरे गठबंधन बनाएंगे, और अगर हम ढांचा नहीं बनाएंगे तो दूसरे ढांचा बनाएंगे।

आयतुल्लाह सईदी ने कहा कि ईरान को होर्मुज़ में रहना चाहिए और दूसरों को भी ईरान की योजना पर मोर्चा अख्तियार करना चाहिए। इसका मतलब यह है कि रिएक्शन की स्थिति से बाहर निकलकर योजनाकार, आमंत्रित करने वाले, शासन करने वाले और मांग करने वाले की स्थिति में प्रवेश कर जाए।

यदि ईरान इस बात का इंतज़ार करता है कि दूसरे क्या कहते हैं और ब्रिटेन और फ्रांस कोई सम्मेलन आयोजित करें और भारत और चीन को सिद्धांत तय करने के लिए आमंत्रित करें, तो वह इस पहल से वंचित हो जाएगा।

उन्होंने होर्मुज़ में उठाए जाने वाले कदमों का उल्लेख करते हुए कहा, पहला यह कि उन सभी देशों को आमंत्रित किया जाए जिनका व्यापार इस जलमार्ग पर निर्भर है, दूसरा क्षेत्र के अरब देशों के साथ परामर्श शुरू करना, और तीसरा यह कि होर्मुज़ के प्रबंधन के लिए नए ढांचे की घोषणा करने की स्थिति में ईरान पर केंद्रित एक नए शासन के गठन की ओर बढ़ा जाए।

उन्होंने जाबिर ट्रम्प द्वारा पोप और ईसाई जगत के नेता के अपमान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कदम से सब समझ गए कि ट्रम्प किसी तर्क का पाबंद नहीं है और अत्याचार के खिलाफ खड़ा होना सभी ईश्वरीय पैग़म्बरों का साझा तरीका है।

क़ुम के इमाम-ए-जुमा ने सड़कों पर लोगों के जमावड़े का जिक्र करते हुए कहा कि अल्लाह के मार्ग में जिहाद करने और झंडा बनाने वाले पहले व्यक्ति हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम थे। इन दिनों जनता अपने उद्देश्यपूर्ण समागमों में ईरान और निडर हिज़्बुल्लाह के झंडे को लहराकर इस झंडे को दुनिया में मज़लूमों का झंडा बनाने और अत्याचार, कुफ्र और वैश्विक अहंकार के झंडे को गिराने का कारण बने, और ईश्वरीय शक्ति और शत्रुओं की पराजय के साथ, यह झंडा महदी आले मोहम्मद अलैहिमुस्सलाम की वैश्विक सरकार के झंडे को बुलंद करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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